सत्य यह है कि Lord Mountbatten – जो भारत के अंतिम वायसराय और विभाजन के समय ब्रिटेन की रणनीति का प्रमुख चेहरा था – उसकी मृत्यु किसी भारतीय ने नहीं की, बल्कि 1979 में आयरलैंड के “IRA (Irish Republican Army)” द्वारा की गई बमबारी में हुई थी।
लेकिन यह सिर्फ सतही जानकारी है। इसके पीछे पूरी ऐतिहासिक, राजनीतिक और नैतिक कहानी छुपी हुई है, जिसे अक्सर लोग भारत से जोड़कर देखते हैं क्योंकि भारत के विभाजन में उनकी कुख्यात भूमिका रही। आइए इसे विस्तार से समझते हैं:
ऐतिहासिक संदर्भ और भारत के लिए इसका अर्थ
1. Mountbatten कौन था?
- पूरा नाम: Louis Francis Albert Victor Nicholas Mountbatten
- ब्रिटिश शाही परिवार का सदस्य, नेवी अधिकारी, और भारत का अंतिम वायसराय (1947)।
- भारत छोड़ते समय, उसने जल्दबाज़ी और अव्यवस्थित तरीके से विभाजन कराया, जिससे लाखों लोग मारे गए और करोड़ों बेघर हुए।
- भारत-पाकिस्तान का विभाजन उसके नाम से हमेशा जुड़ा रहेगा।
- विभाजन के बाद उसे “Earl Mountbatten of Burma” की उपाधि मिली और ब्रिटिश राजनीति में ऊँचे पदों पर रहा।
2. भारत के लिए उसकी भूमिका क्यों विवादास्पद रही?
- जल्दबाज़ी से विभाजन – जून 1948 तक सत्ता हस्तांतरण का कार्यक्रम था, लेकिन उसने इसे एक साल पहले अगस्त 1947 में ही करवा दिया।
- सीमा रेखा (Radcliffe Line) – सीमा खींचने के लिए समय न देकर, ग़लत नक़्शों और अव्यवस्थित प्रशासन से पंजाब व बंगाल में नरसंहार की स्थिति पैदा की।
- कश्मीर समस्या – माउंटबेटन की भूमिका संदिग्ध रही। भारत और पाकिस्तान के बीच विवाद की बुनियाद उसी की नीतियों से रखी गई।
- गांधी और नेहरू पर प्रभाव – यह माना जाता है कि माउंटबेटन दंपत्ति का नेहरू पर गहरा निजी प्रभाव था, जिसने कई निर्णायक फैसलों को प्रभावित किया।
👉 इसीलिए भारत में लाखों लोग मानते हैं कि माउंटबेटन की मृत्यु कहीं न कहीं “कर्म का फल” थी।
3. असली हत्या कैसे हुई?
- तारीख़: 27 अगस्त 1979
- स्थान: Mullaghmore, County Sligo, आयरलैंड
- घटना: माउंटबेटन अपने परिवार के साथ छुट्टियाँ मना रहा था।
- उस दिन वह अपनी नाव (Shadow V) में मछली पकड़ने निकला।
- नाव पर पहले से IRA (Irish Republican Army) ने टाइम बम फिट कर रखा था।
- जैसे ही नाव समुद्र में पहुँची, बम फट गया।
परिणाम:
- Lord Mountbatten की वहीं मौत हो गई।
- उसके पोते (Nicholas, उम्र 14) और एक आयरिश किशोर की भी मौत हुई।
- उसकी पत्नी और एक अन्य पोती बुरी तरह घायल हुए।
4. किसने जिम्मेदारी ली?
- IRA (Irish Republican Army) ने इस हमले की ज़िम्मेदारी ली।
- IRA का उद्देश्य था ब्रिटिश राजशाही और ब्रिटिश कब्ज़े के खिलाफ़ संघर्ष।
- आयरलैंड लंबे समय से ब्रिटिश शासन से आज़ादी चाहता था।
- IRA ने Mountbatten को निशाना इसलिए बनाया क्योंकि वह ब्रिटिश शाही परिवार का अहम सदस्य और साम्राज्यवादी प्रतीक था।
5. भारत के दृष्टिकोण से हत्या का अर्थ
हालाँकि Mountbatten को भारतीयों ने नहीं मारा, लेकिन उसकी हत्या भारत में अलग-अलग भावनाएँ जगाती है:
- कर्म का न्याय (Karmic Justice)
- भारत में कई लोग इसे “दिव्य न्याय” मानते हैं।
- जिसने भारत को जलाया, खून से नहलाया, उसे भी अंततः बम से टुकड़े-टुकड़े होकर मरना पड़ा।
- भारत में वैसा प्रतिरोध क्यों नहीं हुआ?
- भारत में विभाजन की त्रासदी से लाखों परिवार प्रभावित हुए, लेकिन ब्रिटिश नेताओं पर कोई सीधा हमला नहीं हुआ।
- गांधीजी और कांग्रेस नेतृत्व ने हिंसा का रास्ता नहीं चुना।
- आयरलैंड के विपरीत, भारत में स्वतंत्रता आंदोलन अहिंसा की छवि में ढल चुका था।
- इतिहास की विडंबना
- 1947 में माउंटबेटन ने भारत को बांटा।
- 1979 में उसी ब्रिटेन का “टूटता साम्राज्य” आयरलैंड में उसके लिए मौत बनकर आया।
6. हत्या के बाद ब्रिटेन और विश्व की प्रतिक्रिया
- ब्रिटिश मीडिया ने इसे “राजशाही पर हमला” कहा।
- क्वीन एलिज़ाबेथ और प्रधानमंत्री ने इसे राष्ट्रीय शोक का क्षण बताया।
- ब्रिटेन और आयरलैंड के रिश्तों में और तनाव बढ़ गया।
- लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई बुद्धिजीवियों ने कहा –
“जैसे भारत में अंग्रेज़ों के खिलाफ गुस्सा था, वैसे ही आयरलैंड में भी था।”
Lord Mountbatten की हत्या भारतीयों ने नहीं, बल्कि आयरिश स्वतंत्रता सेनानियों (IRA) ने की।
लेकिन इतिहास का व्यंग्य यही है कि:
- जिसने भारत को बांटकर आग में झोंक दिया, वही ब्रिटिश साम्राज्य के विरोधियों का शिकार बना।
- भारत में उसकी मौत को “ईश्वर का न्याय” मानकर याद किया जाता है।
- यह घटना हमें सिखाती है कि साम्राज्यवाद और अन्याय कितनी ही ताक़तवर सत्ता क्यों न हो, आख़िरकार अपने ही पापों से घिरकर ढहता है।