चम्पावत जिला उत्तराखण्ड के कुमाऊं मंडल के अंतर्गत आता है, और मुख्यालय चम्पावत नगर में है, चम्पावत जिले को 1997 में ५ तहसीलों को मिलकर बनाया गया था , २०११ की जनगणना के अनुसार चम्पावत राज्य का दूसरा सबसे कम जनसँख्या वाला जिला है।
चम्पावत जिले का क्षेत्रफल १७८१ वर्ग किलोमीटर है और २०११ की जनगणना के अनुसार चम्पावत की जनसँख्या २२४५४२ और जनसँख्या घनत्व १२६ व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर है, चम्पावत जिले की साक्षरता ८१% है महिला और पुरुष अनुपात ९८१ मिलाये प्रति १००० पुरुषो पर है, २००१ से २०११ के बीच जनसँख्या विकास दर १६% रही है।
चम्पावत जिला भारत में कहाँ पर है
चम्पावत जिला भारत के उत्तराखण्ड राज्य में दक्षिणी भाग में स्थित है,चम्पावत के अक्षांस और देशांतर क्रमशः २९ डिग्री ३३ मिनट उत्तर से ८० डिग्री १० मिनट पूर्व तक है, चम्पावत की उत्तराखंड की राजधानी देहरादून से ४६७ किलोमीटर दक्षिण पूर्व की तरफ है, और दिल्ली से भी चम्पावत ४५० किलोमीटर उत्तर पूर्व में है।
चम्पावत के पडोसी जिले
चम्पावत एक पहाड़ी जिला नहीं है, फिर भी इसके आसपास कई महत्वपूर्ण क्षेत्र है, जैसे चम्पावत के उत्तर में पिथौरागढ़ जिला है, पूर्व में नेपाल है, दक्षिण में उधमसिंह नगर है, पश्चिम में नैनीताल है और पश्चिमोत्तर में अल्मोड़ा जिला है।
Information about Champawat in Hindi
| नाम | चंपावत |
|---|---|
| राज्य | उत्तराखंड |
| क्षेत्र | 1,781 किमी² |
| चंपावत की जनसंख्या | 35,000 |
| अक्षांश और देशांतर | 29.3361 डिग्री नं, 80.0 9 10 डिग्री ई |
| चंपावत का एसटीडी कोड | 5965 |
| चंपावत की पिन कोड | 262523 |
| जिला मजिस्ट्रेट (डीएम कलेक्टर) | श्री गोपाल कृष्ण द्विवेदी |
| पुलिस अधीक्षक (एसपी / एसएसपी) | सुश्री रिधिम अग्रवाल (एसपी) |
| मुख्य विकास अधिकारी | जे.के. तिवारी, |
| मुख्य चिकित्सा अधिकारी | डॉ एसपी अग्रवाल |
| संसद के सदस्य | श्री हेमेश खारकवाल |
| विधायक | हिमेश खारकवाल |
| उपखंडों की संख्या | ना |
| तहसील की संख्या | 4 |
| गांवों की संख्या | 721 |
| रेलवे स्टेशन | निकटतम – तानाकपुर रेलवे स्टेशन |
| बस स्टेशन | बस स्टेशन चंपावत |
| चंपावत में एयर पोर्ट | पंत नगर हवाई अड्डा |
| चंपावत में होटल की संख्या | 10 |
| डिग्री कॉलेजों की संख्या | 2 |
| अंतर कॉलेजों की संख्या | 1 |
| मेडिकल कॉलेजों की संख्या | 3 |
| इंजीनियरिंग कॉलेजों की संख्या | 12 |
| चंपावत में कंप्यूटर केंद्र | 7 |
| चंपावत में मॉल | 16 |
| चंपावत में अस्पतालों | 3 |
| चंपावत में शादी हॉल | 1 |
| नदी (ओं) | शारदा नदी |
| उच्च मार्ग | राष्ट्रीय राजमार्ग 125 |
| ऊंचाई | 1,610 मीटर (5,280 फीट) |
| घनत्व | 126 / किमी 2 (330 / वर्ग मील) |
| आधिकारिक वेबसाइट | Http://champawat.nic.in/ |
| साक्षरता दर | 73% |
| बैंक | बैंक ऑफ बड़ौदा, कोटक महिंद्रा बैंक, यूको बैंक, स्टेट बैंक, कॉरपोरेशन बैंक, पंजाब नेशनल बैंक, आईसीआईसीआई बैंक, यस बैंक, आंध्र बैंक, यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया, ओरिएंटल बैंक, इलाहाबाद बैंक, कोटक महिंद्रा बैंक |
| प्रसिद्ध नेता (ओं) | कालू सिंह महारा |
| राजनीतिक दलों | कांग्रेस, भाजपा, बसपा |
| आरटीओ कोड | UA-03 |
| आधार कार्ड केंद्र | ना |
| स्थानीय परिवहन | गाड़ियों, बस, कार और उड़ान |
| मीडिया | समाचार पत्र, ग्रामीण / शहरी होने के रेडियो, ट्रांजिस्टर, मीडिया, टेलीविजन |
| विकास | 15.4 9% |
| यात्रा स्थलों | मायावती आश्रम, अद्वैत आश्रम, बनसुर का किला, बारही मंदिर, चौमू मंदिर, आदित्य मंदिर, बालेश्वर मंदिर, नागनाथ मंदिर, क्रांतिेश्वर महादेव मंदिर |
| आयुक्त | श्री गोपाल कृष्णन |
चंपावत का नक्शा मानचित्र मैप
गूगल मैप द्वारा निर्मित चंपावत का मानचित्र, इस नक़्शे में चंपावत के महत्वपूर्ण स्थानों को दिखाया गया है
चंपावत जिले में कितनी तहसील है
चम्पावत जिले में ४ तहसीलें है जिनके नाम 1. चम्पावत 2. लोहाघाट 3. पाटी 4. पूर्णागिरि, इन चारो टहिलों में लोहागढ़ तहसील सबसे बड़ी तहसील है और पूर्णागिरि तहसील सबसे छोटी तहसील है।
चंपावत जिले में विधान सभा की सीटें
चम्पावत जिले में विधानसभा की दो सीट है, इन दोनों विधान सभा क्षेत्रो के नाम लोहाघाट और चम्पावत है
चंपावत जिले में कितने गांव है
चम्पावत जिले में 692 गांव है जो की जिले की ४ तहसीलों में विभाजित है जिनकी संख्या तहसील के नाम के अनुसार 1. चम्पावत में १९२ गांव है, 2. लोहाघाट तहसील में २७९ गांव है 3. पाटी में १४२ गांव है और 4. पूर्णागिरि तहसील में सिर्फ ७९ गांव है
History of Champawat in Hindi
पूर्व काल में चम्पावत चाँद साम्राज्य की राजधानी थी, यहाँ का बालेश्वर मंदिर चाँद राजाओ का बनवाया हुआ है, यह १२वी शतब्दी का बना का मंदिर एक अद्वतीय स्मारक है जो की संगमरमर पर कारीगरी का एक बेहतरीन नमूना है, चम्पावत के इतिहास के बारे में कोई ज्यादा जानकारी नहीं है, क्योंकि इसके श्रोत अभी उपलब्ध नही हुए है, पर इस क्षेत्र पर भ मौर्यो, मुघलो, और बाद में अंग्रेजो का अधिपत्य रहा है।