करवा चौथ का सम्बन्ध अर्जुन से भी है

करवा चौथ के बारे में कई प्रकार की कथाएँ प्रचलित है, जिनमे से बहुत ही कथाये हम सभी ने कलेण्डर पर चित्र सहित लिखी देखि है, लेकिन आज हम एक नविन कथा से आपका परिचय कराने जा रहे है जिसका वर्णन महाभारत के भीष्म पर्व में आया हुआ है।

एक बार पांडु पुत्र अर्जुन तपस्या करने नीलगिरी नामक पर्वत पर गए। इधर द्रोपदी बहुत परेशान थीं। उनकी कोई खबर न मिलने पर उन्होंने कृष्ण भगवान का ध्यान किया और अपनी चिंता व्यक्त की। कृष्ण भगवान ने कहा- बहना, इसी तरह का प्रश्न एक बार माता पार्वती ने शंकरजी से किया था।

पूजन कर चंद्रमा को अ‌र्घ्य देकर फिर भोजन ग्रहण किया जाता है। सोने, र्चदी या मिट्टी के करवे का आपस में आदान-प्रदान किया जाता है, जो आपसी प्रेम-भाव को बढ़ाता है। पूजन करने के बाद महिलाएं अपने सास-ससुर एवं बड़ों को प्रणाम कर उनका आशीर्वाद लेती हैं।

तब शंकरजी ने माता पार्वती को करवा चौथ का व्रत बतलाया। इस व्रत को करने से स्त्रियां अपने सुहाग की रक्षा हर आने वाले संकट से कर सकती है।

करवा चौथ कब मनाया जाता है

करवाचौथ का व्रत कार्तिक मास की कृष्ण चतुर्थी को रखा जाता है । करवाचौथ वास्तविक में औरतों की मजबूर इच्छाशक्ति का प्रतीक है जो अपने पति की लम्बी उम्र के लिए पूरा दिन बिना कुछ खाए पीए व्रत करती है ।

२०१७ में करवा चौथ ८ अक्टूबर को पड़ रहा है, करवा चौथ पूजा का मुहूर्त १७:५५ से १९:०९ तक है, इसकी सम्पूर्ण अवधि मात्र १ घण्टा १४ मिनट्स की है और अनुमानित करवा चौथ के दिन चन्द्रोदय का समय रात्रि में २०:१४ पर है।

करवा चौथ व्रत को कौन कर सकता है

वैसे तो ये व्रत विवाहित महिलाओं का है, लेकिन इसे करने के लिए सभी स्वतंत्र है, महिला पुरुष और कन्याये या लड़किया, इसकी करने की विधि सभी के लिए लगभग एक जैसी ही है, लेकिन चुकी ये विवाहित महिलाओ का त्यौहार है इसलिए उनका उल्लेख करना ज्यादा जरुरी है। विवाहित महिलाएं सूर्योदय होने से चन्द्रमा निकलने तक व्रत रखती है । महिलाएं सूर्योदय होने से पहले जो भोजन कहती हैं उसे सरगी कहते हैं । सरगी खाने के बाद महिलाएं पूरा दिन न कुछ खाती हैं न कुछ पीती हैं । इस दिन महिलाएं एकत्रित होकर हाथों पर मेहंदी लगाती हैं ।

व्रत में कुछ बातों का ख्याल
सरगी खाते समय ज़्यादा हेल्दी खाना खाएं और पानी ज़्यादा से ज़्यादा लें । व्रत खोलने के बाद ज़्यादा भोजन का सेवन न करें । अगर आपका कोई ट्रीटमेंट या दवाईयां चल रही हैं तो व्रत न करें । व्रत में कोई एक्सरसाइज न करें, इससे शरीर में कमज़ोरी आ सकती है ।

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